फॉरेस्ट ऑउलेट – 113 साल बाद फिर दिखा

1884 में लुप्त घोषित इस पक्षी को 1997 में फिर से खोजा गया। दुनिया में इसकी 250 से भी कम संख्या बची है। धूप में शिकार करना इसकी सबसे अजीब आदत है। अगली स्लाइड में जानिए दुर्लभ मार्टन के बारे में...

दक्षिण की विरासत – नीलगिरी मार्टन

यह पश्चिमी घाट का 'मास्टर शेफ' है। यह फल खाकर बीज बिखेरता है, जिससे जंगल हरा-भरा रहता है। इसकी संख्या 1000 से भी कम है। आगे पढ़िए...

दक्षिण पॉपकॉर्न की खुशबू वाला बिंटुरोंग– नीलगिरी मार्टन

यह दिखने में भालू और बिल्ली के बीच का होता है। इसके पेशाब से पॉपकॉर्न की महक आती है! 2025 में काजीरंगा में पहली बार इसका प्रमाण मिला। आगे जानिए एक दुर्लभ छिपकली के बारे में...

सांप जैसी दिखने वाली स्किंक

जब आप सोचते हैं कि विज्ञान ने सब खोज लिया है, तो यह स्किंक सामने आती है। यह सांप जैसी छिपकली सिर्फ दो ही जगहों पर पाई गई है। अगली स्लाइड में जानिए क्या है खोज...

उड़न गिलहरी – हवा में 100 मीटर का सफर

यह नन्ही गिलहरी अपने पंजों के बीच फैली झिल्ली की मदद से 100 मीटर तक ग्लाइड कर सकती है। 2026 में इसे छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में कैमरे में कैद किया गया। आगे जानिए क्यों खतरनाक रूप से कम बचा है यार...

मिट्टी में घोंसला बनाने वाला नया मेंढक

अरुणाचल के जंगलों में ऐसा मेंढक मिला है जो पानी में नहीं, बल्कि पत्तियों के नीचे मिट्टी में चिपचिपा घोंसला बनाता है। इसकी आवाज 'वू-ओक' जैसी होती है। अंतिम स्लाइड में जानिए अंतिम सच...

जेरडन कोर्सर – सौ साल बाद मिला पक्षी

848 में मिला यह पक्षी 20वीं सदी में लुप्त मान लिया गया था। 1986 में इसके फिर से मिलने पर वैज्ञानिक हैरान रह गए। आज भी यह पक्षी पूरी तरह से गायब होने की कगार पर है।