बैरन द्वीप – भारत का जागता ज्वालामुखी

अंडमान में स्थित बैरन द्वीप भारत का इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी है. 1787 में पहला विस्फोट रिकॉर्ड किया गया. आखिरी बार 2025 में यह फटा.

काला पानी की काल कोठरी (Cellular Jail)

अंग्रेजों ने यहाँ बनवाई थी सेल्युलर जेल, जिसे 'काला पानी' कहा जाता था. यहाँ वीर सावरकर और कई क्रांतिकारियों को यातनाएं दी गईं.

1943 – नेताजी ने फहराया था यहाँ तिरंगा

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिसंबर 1943 में पोर्ट ब्लेयर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. ये पहली बार था कि ब्रिटिश हुकूमत से आजाद कराकर किसी भारतीय ने यहाँ झंडा फहराया.

बजरंग बली का कनेक्शन – 'अंडमान' कैसे बना?

कहा जाता है कि राम सेतु बनाते समय हनुमान जी यहाँ आए थे. मलय नाविक हनुमान को 'हंडुमन' बुलाते थे. धीरे-धीरे यही शब्द 'अंडमान' में बदल गया. रामायण काल में इसे 'हंडुकमान' के नाम से जाना जाता था

समुद्र के नीचे छुपा है एक 48 किमी लंबा रहस्य

अंडमान सागर में एक 48 किलोमीटर लंबी रहस्यमयी संरचना मिली है. क्या यह राम सेतु का विस्तार है या किसी खोई सभ्यता के अवशेष? वैज्ञानिक आज भी इसे लेकर असमंजस में हैं

या तो यहाँ जन्नत है, या दोजख

कोई इसे आखिरी अपराधियों की जेल कहता है, तो कोई आखिरी जंगल. अंडमान निकोबार के ये रहस्य आपको एक नहीं, बल्कि 572 बार हैरान कर देंगे.